मुझे लगता था मै तन्हा हूँ
या फिर मै चाहता था की मै तन्हा रहूँ
हर दो कदम पे तुम थे वंही
पर तुमको देखा ही कहाँ सही
मेरी रफ़्तार ने कहीं पीछे छोड़ दिया मुझको
आज हर लम्हे में ढूंढता हूँ मै खुद को
आज दौलत की तन्हाई है
नशा है
रवानगी है
पर जिसके लिए चला था कंहा वो दीवानगी है ?
कहने को तो तुम आज भी मेरे साथ हो
पर यूँ लगता है मानो हम तुम एक जिन्दा लाश हों
दिल चीखता है
दरवाजे बंद है पर ये दिखता है
आँखे नम है
सांसे भी सिसकती है
इस पार खड़ा हूँ मै
उस पार शाम आज भी रोती है
चलो फिर आँखों को बंद कर ले
फिर वापस लौट जाए जिसे खोया था
लाशो की ढेर से वापस चल कर भी
क्या वो मिलेगा जिसके लिए ख्वाबो को संजोया था ?
या फिर मै चाहता था की मै तन्हा रहूँ
हर दो कदम पे तुम थे वंही
पर तुमको देखा ही कहाँ सही
मेरी रफ़्तार ने कहीं पीछे छोड़ दिया मुझको
आज हर लम्हे में ढूंढता हूँ मै खुद को
आज दौलत की तन्हाई है
नशा है
रवानगी है
पर जिसके लिए चला था कंहा वो दीवानगी है ?
कहने को तो तुम आज भी मेरे साथ हो
पर यूँ लगता है मानो हम तुम एक जिन्दा लाश हों
दिल चीखता है
दरवाजे बंद है पर ये दिखता है
आँखे नम है
सांसे भी सिसकती है
इस पार खड़ा हूँ मै
उस पार शाम आज भी रोती है
चलो फिर आँखों को बंद कर ले
फिर वापस लौट जाए जिसे खोया था
लाशो की ढेर से वापस चल कर भी
क्या वो मिलेगा जिसके लिए ख्वाबो को संजोया था ?
kya bat hai dude.. or kitti khubiya chipa ke rakhe ho bhai... wonderful & touching lines...
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